Saharsa district

सहरसा जिला

Saharsa district

(District of Bihar in India)


District History

सहरसा जिला का इतिहास: एक विस्तृत विवरण

सहरसा जिला, बिहार राज्य का एक महत्वपूर्ण जिला है, जिसका इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है। इस जिला का इतिहास, प्राचीनकाल से लेकर वर्तमान समय तक, कई उतार-चढ़ावों से गुजरा है। आइए, सहरसा जिले के इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं:

प्राचीन काल:

  • सहरसा जिला प्राचीन काल में मिथिला का हिस्सा था।
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजर्षि जनक, जो माता सीता के पिता थे, का राज्य इस क्षेत्र में था।
  • सहरसा, मिथिला के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक था।
  • क्षेत्र में तंत्र साधना का भी एक समृद्ध इतिहास है।
  • चंडी मंदिर, कट्यायनी मंदिर (धमारा घाट के पास) और तारा मंदिर (महिषी) एक समबाहु त्रिभुज बनाते हैं, जो तंत्र साधकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • नवरात्रि के दौरान, दूर-दूर से लोग यहाँ आकर शक्ति की देवी की पूजा करते हैं।
  • सहरसा के महिषी में मंडन मिश्र और शंकराचार्य के बीच प्रसिद्ध वाद-विवाद हुआ था।

मध्यकाल:

  • मध्यकाल में, सहरसा मगध साम्राज्य और मुगल साम्राज्य के अधीन रहा।
  • इस दौरान, क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम संस्कृति का मिश्रण हुआ।
  • कई मस्जिदों और मंदिरों का निर्माण इस समय में हुआ।

आधुनिक काल:

  • 19वीं शताब्दी में, ब्रिटिश शासन के दौरान, सहरसा मुंगेर और भागलपुर जिलों का हिस्सा था।
  • 1 अप्रैल 1954 को, सहरसा को स्वतंत्र जिला घोषित किया गया, जिसका मुख्यालय सहरसा में स्थापित किया गया।
  • 2 अक्टूबर 1972 को, सहरसा को कोसी प्रमंडल का मुख्यालय बनाया गया।
  • 1 दिसंबर 1972 को, बीरपुर को एक नए सिविल उपखंड के रूप में स्थापित किया गया।
  • 30 अप्रैल 1981 को, मधेपुरा को सहरसा से अलग कर एक नया जिला बनाया गया।
  • 1991 में, सुपौल को भी सहरसा से अलग कर एक नया जिला बनाया गया।
  • वर्तमान में, सहरसा जिला दो उपखंडों में विभाजित है: सहरसा सदर और सिम्‍री बख्तियारपुर
  • जिला में 10 विकासखंड और अंचल हैं।

भूगोल और बाढ़:

  • सहरसा जिला हिमालय से निकलने वाली कई नदियों के किनारे स्थित है।
  • इस क्षेत्र में सालाना बाढ़ और जलमग्नता एक सामान्य घटना रही है।
  • कोसी नदी की अनिश्चितता ने इस क्षेत्र में खेती को प्रभावित किया है।
  • तराई क्षेत्र पहले चावल की खेती के लिए जाना जाता था।

सहरसा जिला, अपनी प्राचीन और समृद्ध संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह जिला, मिथिला की विरासत का केंद्र है और यहां कई प्राचीन मंदिर, स्मारक और ऐतिहासिक स्थल हैं।




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