Nathdwara

नाथद्वारा

Nathdwara

(City in Rajasthan, India)

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नाथद्वारा: श्रीनाथजी का पावन धाम (हिंदी में विस्तृत वर्णन)

नाथद्वारा, भारत के राजस्थान राज्य के राजसमंद जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शहर है। यह अरावली पहाड़ियों में, बनास नदी के किनारे पर बसा हुआ है और उदयपुर से 48 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। यहाँ का प्रमुख आकर्षण श्रीनाथजी मंदिर है, जहाँ भगवान कृष्ण के सात वर्षीय बाल रूप की पूजा की जाती है।

श्रीनाथजी की स्थापना:

श्रीनाथजी की मूर्ति मूल रूप से मथुरा के पास जाटपुरा में स्थापित थी। औरंगजेब के अत्याचारों से बचाने के लिए, मूर्ति को 1672 ईस्वी में गोवर्धन पर्वत से यमुना नदी के रास्ते लाया गया था। लगभग छह महीने आगरा में रहने के बाद, अंततः मूर्ति को नाथद्वारा लाया गया। "नाथद्वारा" का शाब्दिक अर्थ है "श्रीनाथजी (भगवान) का द्वार"।

वल्लभ संप्रदाय का प्रमुख केंद्र:

नाथद्वारा, पुष्टिमार्ग या वल्लभ संप्रदाय या शुद्धाद्वैत का एक महत्वपूर्ण वैष्णव तीर्थस्थल है, जिसकी स्थापना वल्लभाचार्य ने की थी। यह संप्रदाय मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान के लोगों में प्रचलित है। वल्लभाचार्य के पुत्र, विट्ठलनाथजी ने नाथद्वारा में श्रीनाथजी की पूजा को संस्थागत रूप दिया। आज भी, नाथद्वारा का शाही परिवार वल्लभाचार्य महाराज के वंशज हैं, जिन्हें "तिलकायत" या "टीकैत" कहा जाता है।

दर्शन का समय:

मंदिर में भक्तों के लिए प्रतिदिन आठ दर्शन खुलते हैं:

  • मंगला
  • श्रृंगार
  • ग्वाला
  • राजभोग
  • उत्थापन
  • आरती
  • संध्या आरती
  • शयन

मंदिर में प्रवेश:

मंदिर में मोबाइल फोन, चप्पल और जूते ले जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर के द्वार के पास लॉकर की सुविधा उपलब्ध है जहाँ आप अपने मोबाइल और जूते रख सकते हैं। यह मंदिर द्वारा प्रदान की जाने वाली एक निःशुल्क सेवा है।

प्रसाद:

मंदिर में मिलने वाला सभी प्रकार का प्रसाद बहुत स्वादिष्ट होता है।

संक्षेप में:

नाथद्वारा, श्रीनाथजी का पावन धाम होने के साथ-साथ, वल्लभ संप्रदाय का एक प्रमुख केंद्र भी है। यहाँ आने वाले भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कर अपना जीवन धन्य करते हैं।


Nathdwara is a city in the Rajsamand district of the state of Rajasthan, India. It is located in the Aravalli hills, on the banks of the Banas River and is 48 kilometres north-east of Udaipur. Shrinathji, is a swarup of lord Krishna which resembles his 7-year-old "infant" incarnation of Krishna. The deity was originally worshiped at Jatpura, Mathura and was shifted in the year 1672 from Govardhan hill, near Mathura along holy river Yamuna after being retained at Agra for almost six months. Literally, Nathdwara means 'Gateway to Shrinathji (God)'.



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