गुरुवायुर मंदिर
Guruvayur Temple
(Hindu temple in Guruvayur, Kerala, India)
Summary
गुरुवायूर मंदिर: धरती पर वैकुंठ
गुरुवायूर मंदिर, जिसे गुरुपवनपुरी भी कहा जाता है, केरल के त्रिशूर ज़िले के गुरुवायूर शहर में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु (गुरुवायुरप्पन) को समर्पित है, जिन्हें यहाँ कृष्ण के रूप में पूजा जाता है। यह केरल और तमिलनाडु के हिंदुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है और इसे अक्सर "भूलोक वैकुंठ" (पृथ्वी पर स्वर्ग) के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर वैष्णव परंपरा के 108 अभिमन क्षेत्रों में से एक है।
मंदिर की वास्तुकला और देवता:
मंदिर में मुख्य प्रतिमा चार भुजाओं वाले भगवान विष्णु की है, जो शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किए हुए हैं। यह मूर्ति भगवान विष्णु के उस रूप का प्रतिनिधित्व करती है जो उन्होंने कृष्ण के माता-पिता वसुदेव और देवकी को अपने जन्म के समय दिखाया था।
पूजा पद्धति और परंपरा:
मंदिर में पूजा आदि शंकराचार्य द्वारा निर्धारित दिनचर्या के अनुसार होती है। बाद में, चेन्नस रविवारणन नंबूदिरी (1427-1527) ने तांत्रिक पद्धति में इन नियमों को लिखित रूप दिया, जो मंदिर की पूजा परंपरा का आधार बन गया। उनके वंशज ही आज भी गुरुवायूर मंदिर के पुजारी (तंत्री) हैं।
मंदिर प्रबंधन और उत्सव:
मंदिर का प्रबंधन केरल सरकार के नियंत्रण में एक विशेष प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। इस मंदिर के मुख्य त्यौहार हैं:
- कुंभम मास में 10 दिवसीय उत्सव: यह पूयम नक्षत्र पर ध्वजारोहण के साथ शुरू होता है।
- कृष्ण जन्माष्टमी: चिंगम माह में मनाया जाता है।
- गुरुवायूर एकादशी: यह वृश्चिकम माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है।
- मेदम माह का पहला दिन: यह त्यौहार पहले फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता था।
अन्य देवता और मंदिर:
मंदिर में भगवान गणेश, अय्यप्पन और देवी भगवती (जिन्हें यहाँ विशेष महत्व दिया जाता है) की भी पूजा की जाती है। मंदिर परिसर में दो उप-मंदिर हैं, एक भगवान गणेश के लिए और दूसरा नाग देवताओं के लिए।
प्रवेश नियम:
गुरुवायूर मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।