Dandakaranya

दंडकारण्य

Dandakaranya

(Forest featured in Hindu literature)

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दंडकारण्य: रामायण का प्रसिद्ध वन

दंडकारण्य, जिसे दंडक भी कहा जाता है, प्राचीन भारतीय महाकाव्य रामायण में वर्णित एक ऐतिहासिक क्षेत्र और वन का नाम है। यह लगभग 92,200 वर्ग किलोमीटर (भारत के क्षेत्रफल का लगभग 3%) में फैला हुआ है, जिसमें पश्चिम में अबुझमाड़ पहाड़ियाँ और पूर्व में पूर्वी घाट शामिल हैं।

यह क्षेत्र आज के आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है। इसकी लंबाई उत्तर से दक्षिण तक लगभग 300 किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम तक लगभग 500 किलोमीटर है।

दंडकारण्य का महत्व:

  • रामायण में: यह वन भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास का मुख्य स्थान था। यहाँ उन्होंने अपना अधिकांश वनवास का समय बिताया और कई ऋषि-मुनियों से मिले।
  • धार्मिक महत्व: दंडकारण्य को हिंदू धर्म में एक पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ कई प्रसिद्ध मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
  • वनस्पति और जीव जंतुओं की विविधता: यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों, नदियों और झीलों से समृद्ध है। यहां विभिन्न प्रकार के वनस्पति और जीव जंतु पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां भी शामिल हैं।

आज भी, दंडकारण्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और रामायण से जुड़े अपने पौराणिक इतिहास के लिए जाना जाता है।


Dandakaranya, also rendered Dandaka, is a historical region and the name of a forest mentioned in the ancient Indian epic Ramayana. It covers about 92,200 square kilometres (35,600 sq mi) of land, which includes the Abujhmar Hills in the west and the Eastern Ghats in the east, including regions of Andhra Pradesh, Maharashtra, Chhattisgarh, Odisha and Telangana states. It spans about 300 kilometres (200 mi) from north to south and about 500 kilometres (300 mi) from east to west.



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